आफ्नै कुरा
Sunday, 23 December 2012
यो घोड़े जब्रों हुदै काली को तीर म़ा धेरै पानी बगेछ ! मेरा अतीत का पलहरु पनी पानी संगै बगेछ्न !सायद ती दिन हरु भेट्न अब समुन्द्रमै पुग्नु पर्छ होला !
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